Kartik Purnima Ganga Snan : कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से अनजाने पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता भी गंगा में स्नान करते हैं, जिससे उनका आशीर्वाद मिलता है। जानें कब किया जाएगा गंगा स्नान साथ ही जानें महत्व और विधि।
गंगा स्नान का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गंगा स्नान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गंगा स्नान के दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं गंगा स्नान कब किया जाएगा। साथ ही जानें गंगा स्नान का महत्व।
कब है गंगा स्नान 2025 ? ( Ganga Snan 2025 Date )
कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 नवंबर को रात में 10 बजकर 37 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 5 नवंबर को शाम में 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। उदय तिथि के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 5 तारीख को किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा स्नान के लिए सुबह के समय पूर्णिमा तिथि का होना जरूरी है।
गंगा स्नान का महत्व
मान्यता है कि कार्तिक मास में गंगा स्नान करने से व्यक्ति को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही गंगा में स्नान करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। ऐसी मान्यता है कि गंगा स्नान के बाद दान पुण्य करना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, वस्त्र आदि का दान जरुरतमंदों को करना से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन देवी देवता पृथ्वी पर आते हैं और गंगा पर स्नान करते हैं। इस दिन गंगा में स्नान करने से देवी देवताओं का आशीर्वाद भी मिलता है।
गंगा स्नान के दिन क्या करें
- सुबह जल्दी उठें यानी इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
- स्नान करके वैदिक मंत्रों का जप करें। आप चाहें को भगवान शिव के मंत्रों का जप करें। इस बात का ध्यान रखें कि अगर आप गंगा में स्नान के लिए नहीं जा सकते हैं तो घर में पानी में थोड़ा गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
- इस दिन स्नान करके सूर्यदेव को जल अर्पित करें और गंगा मैया की पूजा करें। उनकी आरती करें।
- इस दिन गंगा में दीप दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। साथ ही इस दिन दान पुण्य भी जरूर करें।